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Garuda Purana: मृत्यु के बाद कैसे बचें नरक और प्रेत योनि से, जानिए गरुड़ पुराण का रहस्य

Garuda Purana: गरुड़ पुराण एक ऐसा शास्त्र है, जिसमें जन्म, मृत्यु, पुनर्जन्म और उनके परिणामों को सरल भाषा और कथाओं के माध्यम से समझाया गया है. इस पुराण को हिन्दू धर्म के 18 महापुराणों में से एक माना जाता है.

/ Chaitanya Chaturvedi / 4 min read
Garuda Purana: मृत्यु के बाद कैसे बचें नरक और प्रेत योनि से, जानिए गरुड़ पुराण का रहस्य
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Garuda Purana: मृत्यु के बाद कैसे बचें नरक और प्रेत योनि से, जानिए गरुड़ पुराण का रहस्य

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Garuda Purana Lord Vishnu Niti in Hindi: हिन्दू धर्म में वेद, उपनिषद, ग्रंथ, पुराण आदि अनेक शास्त्र हैं. लेकिन इनमें से पुराणों की भाषा सबसे सरल और सुलभ है, जिसमें श्लोक और कथा के द्वारा ज्ञान का प्रसार किया गया है.

गरुड़ पुराण भी एक ऐसा पुराण है, जो वैष्णव संप्रदाय से जुड़ा हुआ है. इस पुराण का मुख्य पात्र भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ है, जिससे यह पुराण अपना नाम लेता है. गरुड़ पुराण में 289 अध्याय और 18 हजार श्लोक हैं. इस पुराण में मृत्यु के बाद क्या होता है, इसका विस्तार से वर्णन किया गया है. इसमें प्रेत लोक, यमलोक, नरक और 84 लाख योनियों के बारे में बताया गया है. साथ ही गरुड़ पुराण में बताया गया है कि कैसे हम नरक और प्रेत योनि से बच सकते हैं. चलिए जानते हैं इसके बारे में. नरक का रहस्य, इससे कैसे बचें

गरुड़ पुराण में 84 लाख योनियों का उल्लेख है, जिनमें से मनुष्य योनि सबसे उत्तम है. क्योंकि मनुष्य योनि में ही हम अपने कर्मों को सुधार सकते हैं और मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं. लेकिन जो लोग अपने कर्मों को नहीं सुधारते हैं और पाप करते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद नरक में जाना पड़ता है. नरक वह स्थान है, जहां पापी आत्माओं को यमराज के द्वारा विभिन्न प्रकार के दंड दिए जाते हैं. नरक, धरती के नीचे अर्थात पाताल लोक में है. इसे अधोलोक भी कहते हैं. नरक के दंड से बचने के लिए हमें अपने कर्मों को शुद्ध रखना चाहिए और धर्म का पालन करना चाहिए. प्रेत योनि का रहस्य, इससे कैसे बचें

ऐसे लोग जिनका आचरण अशुभ होता है और जो अन्याय, हिंसा, अधर्म, अनैतिकता आदि में लिप्त होते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद प्रेत योनि में जाना पड़ता है. प्रेत योनि वह योनि है, जिसमें आत्मा को शरीर नहीं मिलता है और वह भटकती रहती है. प्रेत योनि में आत्मा को भूख, प्यास, शीत, उष्ण, दुःख, दर्द, भय आदि का अनुभव होता है. प्रेत योनि से बचने के लिए हमें अपने आचरण को शुभ बनाना चाहिए और दया, करुणा, सत्य, अहिंसा, न्याय, भक्ति आदि में रुचि रखनी चाहिए.

गरुड़ पुराण में बताया गया है कि यदि हम मृत्यु के बाद प्रेत योनि में नहीं जाना चाहते हैं तो हमें दान, पुण्य, तप, यज्ञ, जप, ध्यान, पूजा, व्रत, तीर्थ,धार्मिक कार्य करते और कराते करना चाहिए, साथ ही पिंडदान और श्राद्ध कर्म करना चाहिए. इन कामों से आत्मा को प्रेत योनि में नहीं भटकना पड़ता है.

Chaitanya Chaturvedi

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Chaitanya Chaturvedi

Founder and editor of NewsSanskriti, building a living digital home for Sanskriti, stories, Panchang, Jyotish and thoughtful audio essays.

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