शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को,
हुआ था धरती का कल्याण,
जब जन्मदग्नि के घर पे थे,
पैदा हुए एक गुरु महान ।
महाविष्णु की शान बढ़ाकर,
उन्होंने तोड़ा था कर्तविर्य का अभिमान,
रेणुका के प्रिय थे वो जो,
नाम है उनका परशुराम ।
शिव के समझ करके तप,
उन्होंने पाया था एक पर्शु,
अपने पिता के प्रिय बने वो जो,
उनको प्रिय थी कामधेनु ।
होकर उनकी निष्ठा से खुश,
पिता न दिया था उनको एक वरदान,
ब्राह्मण कुल के शान बने वो जो,
नाम है उनका परशुराम ।
त्रेता युग में जन्म लिया और,
देखा राम का वाग्दान,
द्वापर युग में भी भाग लिया और,
दिया कर्ण को अदभुत ज्ञान ।
कलयुग में भी दर्शन देंगे,
कल्की के वो गुरु बनेंगे,
फिर होगा इस धरती का कल्याण,
विष्णु के वो छटे रूप जो,
नाम है उनका परशुराम ।
परशुराम by Chaitanya Chaturvedi is licensed under Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International
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