एक समय था
जब यूं बस खेल और खिलौनों में ख़ुशियों खोजा करता था
एक समय था
जब युं बस अच्छे कामों में मुस्कुराहट बटोरे करता था
एक समय था
जब कार्टून और फ़िल्मों में वक़्त गुज़र जाते थे
एक समय था
जब एक बिस्कुट दो दोस्तों में बट जाते थे
एक समय था
जब छोटी-छोटी ग़लतियों पर रोया करता था
एक समय था
जब दिन भर की शैतानियों के बाद भी
चैन की नींद सोया करता था
एक समय था
जब प्यार के दो अल्फ़ाज़ से शर्म आती थी
एक समय था
जब यारीआं ज़िंदगी की एहसास दे जाती थी
वो समय था
जब मैं भोला था
फिर एक दिन आया
जब किसी अपने पर आंच आई
फिर एक दिन आया
जब इस दुनिया ने अपनी असलियत दिखाई
फिर एक दिन आया
जब उस अपने के लिए दिल से आवाज़ उठा
फिर एक दिन आया
जब दिल भी उनके लिए धधक उठा
उस दिन
न जाने उस भोलेपन को क्या हुआ
की सारि शरीफियत का ही काम तमाम होगया
और ये ब्राह्मण बिना परशु के परशुराम होगया
उस दिन ये एहसास हुआ
की हाँ सच्चा प्यार होता है
मैंने किया है
की हाँ प्यार सूरत नहीं सीरत से होता है
मैंने भी किया है
और इसलिए
आज मैं दिल खोल के ये कहता हूँ
की चाहें जितनी नाफरमानी करता हुं
चाहे जीतनि उपेक्षा करता हुं
पर माँ मैं तुमसे प्यार करता हु
की चाहे जितने अनादर करता हु
चाहै जितना नज़रअंदाज़ करता हु
पर पापा मैं आप से भी प्यार करता हुं
मेरा पहला प्यार by Chaitanya Chaturvedi is licensed under Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International
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