गणेश जी की सभी आरती
गणेश भगवान की सभी आरती वर्णन के साथ
परिचय
गणेश भगवान हिन्दू धर्म के सबसे प्रसिद्ध और पूज्य देवता हैं। वे शिव और पार्वती के पुत्र, गणों के नायक, विघ्नों के हर्ता, बुद्धि और सिद्धि के दाता, और शुभ कार्यों के आरंभ में अग्रपूजित हैं। वे एकदंत, वक्रतुंड, लम्बोदर, गजानन, गणपति, विनायक, गणेश आदि नामों से जाने जाते हैं। वे मूषक नामक चूहे को अपना वाहन मानते हैं। वे मोदक नामक मिठाई को बहुत पसंद करते हैं।
गणेश भगवान के प्रतीक और उनका महत्व भी बहुत गहरा है। उनका हाथी का सिर उनकी बुद्धि, ज्ञान, शक्ति और सौम्यता का प्रतीक है। उनका एक दांत उनकी अनन्यता, विश्वसनीयता और त्याग का प्रतीक है। उनका वक्रतुंड उनकी विनम्रता, नम्रता और अहंकारहीनता का प्रतीक है। उनका लम्बोदर उनकी समृद्धि, भोग और विशालता का प्रतीक है। उनका मूषक उनकी चतुराई, चालाकी और निर्भयता का प्रतीक है। उनका मोदक उनकी मिठास, आनंद और प्रसन्नता का प्रतीक है।
आज हम गणेश भगवान की कुछ लोकप्रिय आरतियों के बारे में जानेंगे, जो उनकी पूजा में गाई जाती हैं। आरती एक भक्ति का रूप है, जिसमें दीपक को देवता के चारों ओर घुमाकर उनकी आराधना की जाती है। आरती में देवता के रूप, गुण, कृपा और महिमा का वर्णन किया जाता है। आरती के साथ ही भक्त अपनी कामनाएं, विनतियां और शुभकामनाएं भी प्रकट करते हैं। आइए नीचे देखें कि गणेश जी की कौन-कौन सी आरतियां हैं और उनके बोल क्या हैं।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा:
यह गणेश जी की सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसे लगभग सभी भारतीय राज्यों में गाया जाता है। इस आरती में गणेश जी के रूप, गुण, लीला और कृपा का वर्णन किया गया है। इस आरती का रचयिता कौन है, यह निश्चित नहीं है, लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि यह आरती संत गोस्वामी तुलसीदास ने रची थी। इस आरती के बोल इस प्रकार हैं:
श्री गणेशाय नमः ।।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
सुख करता दुख हरता:
यह गणेश जी की एक और प्रसिद्ध आरती है, जिसे मुख्य रूप से महाराष्ट्र में गाया जाता है। इस आरती में गणेश जी को दुखों का नाश करने वाला और सुखों का दाता बताया गया है। इस आरती का रचयिता संत रामदास स्वामी है, जो छत्रपति शिवाजी के गुरु थे। इस आरती के बोल इस प्रकार हैं³⁴:
श्री गणेशाय नमः ।।
सुख करता दुख हरता, वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची॥
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
कंठी झाले माळ मुक्ताफळाची॥
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति।
दर्शनमात्रे मन कामना पूर्ति॥
रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमारा।
चंदनाची उटी कुमकुमकेशरा।
हिरे जडित मुकुट शोभतो बारा।
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥
जय देव जय देव...।
लंबोदर पीतांबर फणिवर बंधना।
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहती।
कृपासिंधु देहि मुद्रा लावती॥
जय देव जय देव...।
विघ्न विनाशन मंगलदायका।
पद्मा गर्भ स्थित गणाध्यक्षा।
पद्मानने पूजितो गजमुखा।
वरदा भवे निज देवा॥
जय देव जय देव...।
गणपती बाप्पा मोरया।
मंगलमूर्ती मोरया।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव।
त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव।
त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
जय देव जय देव...।
गणनायकाय गणदेवताय:
यह गणेश जी की एक आधुनिक आरती है, जिसे फिल्म विरुद्ध में शंकर महादेवन ने गाया था। इस आरती में गणेश जी को गणों का नायक, देवताओं का देवता, ज्ञान का सागर, शक्ति का स्वरूप और अनंत का प्रतीक बताया गया है। इस आरती का रचयिता अजय-अतुल हैं, जो एक प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी हैं। इस आरती के बोल इस प्रकार हैं :
श्री गणेशाय नमः ।।
गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि।
गुणशरीराय गुणमंडिताय गुणेशानाय धीमहि।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रणयाय धीमहि॥
एकदंताय वक्रतुंडाय गौरीतनयाय धीमहि।
गजेशानाय भालचंद्राय श्रीगणेशाय धीमहि॥
गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि।
गुणशरीराय गुणमंडिताय गुणेशानाय धीमहि।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रणयाय धीमहि॥
ज्ञानशक्ति समारूढा ज्ञानविज्ञान चक्रधारी।
ज्ञानविज्ञान विमुक्ताय ज्ञानविज्ञान निधनाय।
ज्ञानविज्ञान निर्मुक्ताय ज्ञानविज्ञान निधाय।
ज्ञानविज्ञान निर्मलाय ज्ञानविज्ञान निधाय॥
अनंताय निरंतराय अनादिनिधनाय धीमहि।
अनादिभूताय अनादिकारणाय अनादिसाधनाय धीमहि।
अनादिविद्याय अनादिशक्तये अनादिशान्ताय धीमहि॥
गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि।
गुणशरीराय गुणमंडिताय गुणेशानाय धीमहि।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रणयाय धीमहि॥
ये थी कुछ गणेश जी की आरती के बोल और उनकी पृष्ठभूमि। 😊
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